मन के वृंदावन में काव्य कृति का वर्ल्ड बुक फेयर में हुआ विमोचन
Man Ke Vrindavan Mein
"डिजिटल तकनीक के साथ पुस्तकें नए आधुनिक अवतरण में आनी चाहिए"-अवधेश कुमार विश्लेषक
"देश काल की वर्तमान चुनौतियों पर लेखनी चलाएं
रचनाकार"-- राकेश राजपूत, फिल्म एक्टर
अनिल गुप्ता अर्थ प्रकाश दिल्ली
नई दिल्ली/ एटा दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम के विराट भवन 53 वें वर्ल्ड बुक फेयर “विश्व पुस्तक मेला में जिज्ञासा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित के एटा के सीनियर पत्रकार राजू उपाध्याय की काव्य कृति "मन के वृंदावन में" का विमोचन देश के शीर्षस्थ पत्रकार एवं टीवी पैनलिस्ट अवधेश कुमार एवं फिल्म अभिनेता राकेश राजपूत के द्वारा भव्य रूप में सम्पन्न हुआ। विमोचन के अवसर पर बोलते हुए देश के शीर्षस्थ पत्रकार अवधेश कुमार ने कहा कि " प्रेम का मानव जीवन में सर्वथा अभाव है और यह दुनियावी संकट है यह टिप्पणी उन्होंने एक रचना "सौ सौ जन्म"
पढ़ते हुए की उन्होंने कहा आज आकर्षक जीवन स्तर पर होने के बाद भी अपनत्व की तलाश में मनुष्य भटक रहा है ।उन्होंने आधुनिक संदर्भों मे रचनाकारों का ध्यान आकृष्ट करते हुए देश समाज की चुनौतियों पर भी कलम चलाने का रचनाकारों से आग्रह किया।अवधेश कुमार ने कहा पुस्तकों को अब डिजिटल अवतरण में होना आवश्यक है जो आधुनिक समाज में दोनों का अस्तित्व जरूरी है जो समय की मांग है। दोनों माध्यम मानव जीवन के लिए जरूरी बन गए हैं , उन्होंने रचनाकारों से भारत माता की अपेक्षाओं के अनुरूप रचनाधर्मिता की दिशा बदलनी होगी। इस अवसर पर यूथ आइकॉन के रूप मशहूर फिल्म एक्टर राकेश राजपूत ने कहा विमोचन कृति पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। इस अवसर उन्होंने कहा वर्तमान माहौल में देश काल की विसंगतियों पर भी कलम रचनाकारों को चलानी होगी। समसामयिक संदर्भों में रचनाकारों की ओर टकटकी लगाए देख रही है उन्होंने इस अवसर पर अनेक ज्वलंत विसंगतियों को रेखांकित किया। जोरदार कटाक्ष करते हुए रचनाकारों का ध्यान आकृष्ट किया इस मौके पर उन्हें विमोचन में शामिल करने के प्रकाशक एवं मन के वृंदावन की कृति के रचनाकार को गर्मजोशी से मुबारकबाद दी।
वरिष्ठ पत्रकार राजू उपाध्याय का यह दूसरा संग्रह है इस पूर्व पिछले वर्ल्ड बुक फेयर में एक किताब एहसासों की नर्म दूब लोकार्पित हुई थी। "मन के वृंदावन में" कुल रचनाएं 177 है 200 पेज का संग्रह है। पुस्तक की भूमिका त्रिभुवन विश्व विद्यालय काठमांडू नेपाल की हिंदी की विभागाध्यक्ष डॉ श्वेता दीप्ति ने लिखी है। पुस्तक पर विहंगावलोकन झारखंड के हिंदी मर्मज्ञ दिव्येंदु त्रिपाठी ने दिया। पुस्तक आकर्षक आवरण के साथ प्रथमदृष्टया प्रेम आध्यात्मिक रूप को प्रदर्शित करती है। विमोचन में उन्होंने अवगत कराया प्रेम पर आध्यात्मिक स्पर्श है परंतु रचनाओं में युग बोध और विसंगतियों के बिम्ब भी है। रचनाओ की पांच श्रृंखलाएं है जो पाठकों को अलग अलग भाव प्रवाह से जोड़ेगी
विमोचन के इस अवसर पर भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ (ट्रस्ट) भारत के संस्थापक अनिल गुप्ता ने विमोचन कर्ता अतिथियों का शाल उड़ा कर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। विमोचित कृति जिज्ञासा प्रकाशन गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित की गई है।
इस अवसर पर जिज्ञासा प्रकाशन के निदेशक मित्र पाल सिंह सिसौदिया,आदित्य राजपूत एडवोकेट नई दिल्ली,जिज्ञासा सिसोदिया,निधि सिसोदिया,नूतन उपाध्याय,संकल्प उपाध्याय,शिवानी उपाध्याय,एवं अनेक साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित रहे।